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Acharya Siyaramdas

एक बार ऋषियों के बीच यह प्रश्न उपस्थित हुआ कि सबसे बड़ा

कौन है ?

किसी ने कहा--पृथ्वी ।

दूसरे ने उत्तर दिया --शेषनाग जी ; क्योंकि उन्होने पृथ्वी को अपने शिर पर धारण कर रखा है ।

अन्य ऋषि ने इसका प्रतिवाद करते हुए कहा कि "नही" -ऐसा नही है। शेष से बड़े शिव जी है ;क्योंकि उन्होंने शेषनाग को अपने मुकुट में धारण कर रखा है ।

चतुर्थ ऋषि ने कहा " मुनिवर शिव जी को तो कैलाश ने धारण कर रखा है । अतः वह उनसे बड़ा है ।

इसका प्रतिषेध करते हुए अन्य ऋषि ने कहा कि बन्धुवर ! कैलाश से बड़ा रावण है ;क्योंकि उसने कैलाश को अपनी भुजाओं से उठा लिया था ।

दूसरे ऋषि अपनी असहमति व्यक्त करते हुए बोले --वाह भाई ! रावण से बड़ा तो वानरराज बालि है जिसने रावण को अपनी कांख में बाध कर रख लिया था ।

अन्य ऋषि ने प्रत्युत्तर में कहा -- कि बालि से बड़े सर्वव्यापक भगवान श्रीराम हैं ;क्योंकि उन्होने बालि को युद्ध में जीत लिया है ।

इस पर विद्वान् ऋषियों ने निर्णय दिया कि " जो सर्वव्यापक भगवान् को भी अपने हृदय में धारण कर रखे हैं वे भगवत्परायण भक्त ही सबसे बड़े हैं ----

पृथ्वी शेषधृता स शम्भुमुकुटे कैलाशवासोऽप्यसौ,  कैलाशोऽपि दशाननेन तुलितो बद्धोऽप्यसौ बालिना ।

बाली राघवविष्णुना युधि जितो विष्णुः सतां मानसे, तस्माद् विष्णुपरायणात् गुरुतरो नान्योऽस्ति लोकत्रये ।।----- --कौशिकी संहिता

 जय श्रीराम

#आचार्यसियारामदासनैयायिक

Acharya Siyaramdas
आचार्य सियारामदास नैयायिक
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आचार्य जी के बारे में

आचार्य सियारामदास नैयायिक

जीवनवृत्त--

नाम- आचार्य सियारामदास नैयायिक

जन्मतिथि ---1/10/1967

लिंग- पुरुष

आश्रम- सन्न्यास

गुरुदेव----- महान्त श्रीनृत्यगोपालदास शास्त्री

अध्यक्ष---श्रीरामजन्मभूमिन्यास समिति

श्रीमणिरामदासछावनी सेवाट्रस्ट, अयोध्या,फैजाबाद, उत्तर प्रदेश,भारत ।

>>>>>>>> शैक्षणिक योग्यता<<<<<<<<<<

न्यायाचार्य---सन् 1989

वेदान्ताचार्य--सन् 1992

स्वतन्त्र अध्ययन ----नव्य व्याकरण, साहित्य, पूर्वमीमांसा,आदि

अध्ययन सान्निध्य--अयोध्या में -- श्रीरामदुलारे शुक्ल, श्

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