Supportntest
Acharya Siyaramdas [caption id="attachment_5540" align="aligncenter" चौड़ाई ="960"]दार्शनिक कवि का मोक्षार्थियों पर भी व्यंग्य--आचार्य सियारामदास नैयायिक दार्शनिक कवि का मोक्षार्थियों पर भी व्यंग्य--आचार्य सियारामदास नैयायिक[/caption]

उभयी प्रकृतिः कामे सज्जेदिति मुनेर्मनः । अपवर्गे तृतीयेति भणतः पाणिनेरपि ।।

भावार्थ--उभयी प्रकृतिः=पुरुष और नारी स्वभाव वाले दोनों ही, कामे=काम में, सज्जेत्= प्रवृत्त होते हैं! इति=ऐसा, पाणिनेः=पाणिनि, मुनेः=मुनि का, अपि=भी! मनः=मन है । अर्थात् इस तथ्य को वे भी स्वीकार करते हैं; क्योंकि उनके द्वारा, "अपवर्गे तृतीया" --ऐसा सूत्र बनाया गया है । जिसका सीधा अर्थ है--तृतीया=तीसरी प्रकृति वाले अर्थात् नपुंसक
लोग, अपवर्गे= मोक्ष में, प्रवृत्त होते हैं ।
-ऐसा श्रीहर्ष ने व्यंग्य किया है ।
कवि विनोदी स्वभाव के होते हैं । जब काम का प्रतिपादन करना होता है तब अपने विषयवस्तु की सिद्धि हेतु व्याकरण के
अन्य प्रयोजन हेतु विनिर्मित सूत्र को भी अपना लेते हैं । और संघटित ऐसा करते हैं कि विद्वान् उनके काव्यकौशल से चमत्कृत हो उठता है । भले ही उसका यथार्थ से कोई सम्बन्ध न हो ।

जय श्रीराम

#आचार्यसियारामदासनैयायिक

Acharya Siyaramdas
आचार्य सियारामदास नैयायिक
Acharya Siyaramdas
आचार्य जी के बारे में

आचार्य सियारामदास नैयायिक

जीवनवृत्त--

नाम- आचार्य सियारामदास नैयायिक

जन्मतिथि ---1/10/1967

लिंग- पुरुष

आश्रम- सन्न्यास

गुरुदेव----- महान्त श्रीनृत्यगोपालदास शास्त्री

अध्यक्ष---श्रीरामजन्मभूमिन्यास समिति

श्रीमणिरामदासछावनी सेवाट्रस्ट, अयोध्या,फैजाबाद, उत्तर प्रदेश,भारत ।

>>>>>>>> शैक्षणिक योग्यता<<<<<<<<<<

न्यायाचार्य---सन् 1989

वेदान्ताचार्य--सन् 1992

स्वतन्त्र अध्ययन ----नव्य व्याकरण, साहित्य, पूर्वमीमांसा,आदि

अध्ययन सान्निध्य--अयोध्या में -- श्रीरामदुलारे शुक्ल, श्

और पढ़ें
  • नवीनतम लेख

  • खोज



  • नवीनतम ब्लॉग
    मार्च 31, 2018 “हनुमज्जयन्ती शब्द हनुमज्जन्मोत्सव की अपेक्षा विलक्षणरहस्यगर्भित है “ Tweetआज हनुमज्जयन्ती महोत्सव है । आजकल वाट्सएप्प से ज्ञानवितरण करने वाले एक मूर्खतापूर्ण सन्देश सर्वत्र प्रेषित कर रहे हैं कि हनुमज्यन्ती न कहकर इसे हनुमज्जन्मोत्सव कहना चाहिए ; क्योंकि जयन्ती मृतकों की मनायी जाती है । यह मात्र भ्रान्ति ही है । पहले जयन्ती का अर्थ प्रस्तुत किया जाता है… और पढ़ें