अहंकार और विघ्न

साधना के अहंकार तक ही विघ्नों की सीमा है । अहंकार विगलित हुआ तो आत्मस्वरूप के साक्षात्कार के साथ ही विघ्नों का समूल विनाश हो जाता है ।

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आचार्य सियारामदास नैयायिक श्रीरामानन्दाचार्यवेदान्तपीठाध्यक्ष जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, मदाऊ,पो0 भाँकरोटा , जयपुर, राजस्थान ईमेल:guruji@acharysiyaramdas.com: +91-8104248586, +91-9460117766

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