गीतागङ्गा महानदी

 

 

भगवद्गीताम 

मुरघ्नगिरिसम्भूता अनन्ताम्बुधिगामिनी  । पावयत्यखिलान् लोकान्  गीतागंगा महानदी ।।

 

पंचशिर मुर ( पंचपर्वा अविद्याख्यापरपर्याय अज्ञान ) के विनाशक भगवान् वासुदेव रूपी अद्रि से समुद्भूत 

“सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म” इत्याद्याकारक श्रुतिसमुद्घोषित अविनाशी ब्रह्मस्वरूप सागरगामिनी  गीतागंगारूपिणी

महानदी समस्त लोकों को पवित्र कर रही हैं ।

—#आचार्यसियारामदासनैयायिक

 

 

 

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आचार्य सियारामदास नैयायिक श्रीरामानन्दाचार्यवेदान्तपीठाध्यक्ष जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, मदाऊ,पो0 भाँकरोटा , जयपुर, राजस्थान ईमेल:guruji@acharysiyaramdas.com: +91-8104248586, +91-9460117766

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