बुद्धिवर्धक मन्त्र

मानिषादप्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः ।
यत्कौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम् ।।–आचार्य सियारामदास नैयायिक

 

मानिषादप्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः ।
यत्कौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम् । ।
महर्षि वाल्मीकि के मुख से सर्वप्रथम इसी श्लोक के रूप में भगवती सरस्वती का प्राकट्य हुआ । ऐसा ब्रह्मा जी ने स्वयं उन्हें बतलाया है ।
यदि कोई भी व्यक्ति प्रातःकाल सोकर उठने के बाद सर्वप्रथम इस मन्त्र का मन ही मन 7 बार जप कर ले तो उसकी बुद्धि तीक्ष्ण होती है और वह माँ शारदा का कृपापात्र बनता है । इसके जप के पूर्व कुछ बोला न जाय । जप सोये हुए विस्तर पर ही करना है ।
जय श्रीराम

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आचार्य सियारामदास नैयायिक भूतपूर्व पीठाध्यक्ष श्रीरामानन्दाचार्यवेदान्तपीठ जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, मदाऊ,पो0 भाँकरोटा , जयपुर, राजस्थान ईमेल:guruji@acharysiyaramdas.com: +91-9460117766

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