भगवान् बुद्ध का जन्मस्थल “कीकट” देश भारत में ,नेपाल में नही

बुद्ध

“कीकट” देश में भगवान् बुद्ध के अवतार का उद्घोष भगवान् कृष्णद्वैपायन
व्यास स्वयं करते हैं—

“ततः कलौ सम्प्रवृत्ते सम्मोहाय सुरद्विषाम् । 
बुद्धो नाम्नाजनसुतः कीकटेषु भविष्यति ॥”
-भागवतमहापुराण–1/3/24,

कलियुग के प्रवृत्त होने पर देवद्रोहियों के सम्मोहन हेतु अजन के पुत्र बुद्ध “कीकट” देश में उत्पन्न होंगे । 

(यह चर्चा कृष्णावतार तक लिखने के बाद व्यास जी ने की है और अन्त में कल्कि अवतार तथा इन दोनो के मध्य बुद्धावतार की चर्चा हुई है । प्रमाण दिया जा चुका है । संस्कृतज्ञ देख सकते हैं )

इस श्लोक की व्याख्या में भागवत के सुप्रसिद्ध टीकाकार श्रीश्रीधर स्वामी “कीकट” का अर्थ “गया प्रदेश” करते हैं—

“बुद्धावतारमाह। अजनस्य सुतः । 
कीकटेषु मध्ये गया प्रदेशे॥24॥”

“गया” से प्रत्येक सनातनधर्मी सुपरिचित है और पितृभक्त वहां श्राद्ध आदि करने अवश्य पहुंचते हैं । 

शक्तिसंगमतन्त्र में भी ” कीकट” देश के अन्दर मगध बतलाया गया है –

“तावत् कीकटदेशः स्यात्तदन्तर्मगधो भवेत् ॥”

शब्दकल्पद्रुम में यह स्पष्ट किया गया है कि ” कीकट” विहार को कहते हैं और यहीं बुद्ध अवतरित हुए–

“कीकटः वेहार इति ख्यातः । अत्र बुद्धः समजनि इति”
भागवतम्–1/3/24,

“अभिधान चिन्तामणि” में कीकट मगध का ही नाम कहा गया है—

” कीकटा मगधाह्वयाः” .

मेदिनीकोष में यह तथ्य स्पष्ट लिखा है कि देशविशेष “कीकट” 
शब्द बहुवचनान्त है । अत एव व्यास जी ने “कीकटेषु ” ऐसा बहुवचनान्त प्रयोग किया । 

“कीकट” देश कुत्सित आचार से परिपूर्ण है । अतः कीकट बनाम मगध में तीर्थयात्रा के विना जाने पर पुनः संस्कार कराने की आवश्यकता शास्त्रों में बतलाई
गयी । 

अंगबंगकलिंगेषु सौराष्ट्रमगधेषु च । 
तीर्थयोगं विना गत्वा पुनः संस्कारमर्हति ॥

नेपाल देश ऐसा नही है कि वहां जाकर पुनः संस्कार कराने का आदेश शास्त्र देते हों । और वहां देवविरोधी भी नही थे जिनको मोहित करने के लिए भगवान् बुद्ध वहां अवतरित हों । 

इसलिए शाक्यवंशी शुद्धोदन के पुत्र बुद्ध से भिन्न ये बुद्धावतार है जो नेपाल नही अपितु विहार प्रान्त के “गया” में हुआ । 

इसमें भागवत के सुप्रसिद्ध व्याख्याकार श्रीश्रीधर स्वामी (1290 –1380 A.D) भी कण्ठतः विहार के “गया” नामक स्थलविशेष को भगवान् बुद्ध की जन्मस्थली घोषित किये । 

दशम स्कन्ध में जरासन्ध को मगध शब्द से उसके बन्दी नृपगण भगवान् कृष्ण से संकेत करते हैं —

“बद्धान् वियुंक्ष्व मगधाह्वयकर्मपाशात् । “
–भा.पु.10/70/29,

विहार का राजगृह जनपद जरासन्ध के अखाड़े का स्पष्ट दर्शन अभी तक करा रहा है । 

अतः इन साक्ष्यों से “कीकट” मगध ही है । जो भारत का भागविशेष है । अतः भगवान् बुद्ध की जन्मस्थली भारत ही है नेपाल नही । 

जय श्रीराम

जयतु भारतम्, जयतु वैदिकी संस्कृतिः

#आचार्यसियारामदासनैयायक 

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आचार्य सियारामदास नैयायिक भूतपूर्व पीठाध्यक्ष श्रीरामानन्दाचार्यवेदान्तपीठ जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, मदाऊ,पो0 भाँकरोटा , जयपुर, राजस्थान ईमेल:guruji@acharysiyaramdas.com: +91-9460117766

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