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महात्मा गांधी राष्ट्रपिता नहीं

 

 

इन पांच ‘राष्ट्रीय भ्रमों’ के शिकार कहीं आप तो नहीं

रजनीश कुमारबीबीसी संवाददाता
  • 7 जून 2017
 

राजस्थान हाई कोर्ट के जज ने हाल ही में गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की सिफारिश की थी. जस्टिस शर्मा की सिफारिश को लेकर काफ़ी विवाद हुआ. ऐसे विवादों में अक्सर सच कहीं और छिप जाता और लोगों की धारणा हावी हो जाती है. 

जिस तरह से राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय चिह्न, राष्ट्र गान और राष्ट्र गीत हैं क्या उसी तरह से वाकई राष्ट्रीय पशु या राष्ट्रीय पक्षी हैं? देश के जाने माने संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज और चिह्न को संविधान सभा ने स्वीकार किया था लेकिन पशु और पक्षी के साथ ऐसा नहीं है. 

कश्यप का कहना है कि ऐसे मामलों में नोटिफिकेशन जारी किया जाता है. 

गाय राष्ट्रीय पशु घोषित होः राजस्थान हाईकोर्ट

नोटिफ़िकेशन

पर्यावरण और वन मंत्रालय ने इस मामले में 2011 में नोटिफिकेशन जारी किया था. इस नोटिफिकेशन में बाघ को राष्ट्रीय पशु और मोर को राष्ट्रीय पक्षी का दर्जा देने की बात कही गई लेकिन ये दर्जा संवैधानिक हैसियत नहीं रखता.

इस नोटिफिकेशन को पर्यावरण और वन मंत्रालय के वाइल्ड लाइफ विभाग ने जारी किया था. वाइल्ड लाइफ विभाग ने कहा कि किसी पशु को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलने का मतलब उसके संरक्षण से है न कि राष्ट्रीय अस्मिता और गर्व से. 

 
 
कौन बने राष्ट्रीय पशु? गधा!

क्या राष्ट्रीय है और क्या क्षेत्रीय इसे लेकर लोगों की बीच काफ़ी भ्रम की स्थिति रहती है. हम यहां ऐसे ही कुछ ‘राष्ट्रीय झूठ’ के बारे में आपको बता रहे हैं. 

हिन्दी राष्ट्र भाषा नहीं है

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सुभाष कश्यप का कहना है कि देश की कोई एक राष्ट्रभाषा नहीं है बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाएं राष्ट्रभाषा हैं. 

कमल राष्ट्रीय फूल नहीं

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कमल के राष्ट्रीय फूल होने के संबंध में भी सरकार के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है. कमल बीजेपी का चुनाव चिह्न है, न कि राष्ट्रीय फूल. 

महात्मा गांधी राष्ट्रपिता हैं?

आधिकारिक रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रपिता नहीं हैं. महात्मा गांधी के लिए पहली बार राष्ट्रपिता शब्द का इस्तेमाल सुभाषचंद्र बोस ने किया था. इसके बाद से ही उन्हें सम्मान देने के लिए राष्ट्रपिता कहा जाने लगा. 

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कोई राष्ट्रीय मिठाई या फल नहीं

लोगों के बीच आम धारणा है कि आम राष्ट्रीय फल है लेकिन यह ग़लत है. देश में पैदा होने वाले किसी भी फल को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय श्रेणी में नहीं रखा गया है. 

उसी तरह किसी मिठाई को भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय श्रेणी में नहीं रखा गया है.

हॉकी राष्ट्रीय खेल नहीं है

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भारत में हॉकी को लेकर भी एक राष्ट्रीय भ्रम है कि यह राष्ट्रीय खेल है. जब भी हॉकी की स्थिति पर यहां बात होती है तो तो सबसे पहले यह कहा जाता है कि हमारे देश के राष्ट्रीय खेल की ऐसी दुर्दशा हो गई है. 2012 में केंद्र सरकार से युवा मामलों के मंत्रालय ने साफ़ कर दिया था कि हॉकी राष्ट्रीय खेल नहीं है. 

 

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के बारे में Acharysiyaramdas

आचार्य सियारामदास नैयायिक भूतपूर्व पीठाध्यक्ष श्रीरामानन्दाचार्यवेदान्तपीठ जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, मदाऊ,पो0 भाँकरोटा , जयपुर, राजस्थान ईमेल:guruji@acharysiyaramdas.com: +91-9460117766

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