रामपालमोहविद्रावण अनुत्तम-शब्द-विमर्श

भगवद्गीता के सातवें अध्याय के १८ वें श्लोक में रामपाल नामक एक महाशय “अनुत्तमां गतिम् ।।” में आये अनुत्तम (अनुत्तमां के पुल्लिंग अनुत्तम शब्द पर ) विचार प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि यहां अनुत्तम का अर्थ सर्वश्रेष्ठ नहीं है । ऐसा अर्थ अज्ञानी अनाड़ी करते हैं । स्वामी निश्चलानन्द जी महाराज से एक सज्जन पूछते हैं कि उत्तम और अनुत्तम में क्या अन्तर है ?

 
प्रष्टा महानुभाव सुन लें । दोनों शब्दों का अर्थ है श्रेष्ठ । हम पहले इसे सप्रमाण पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं –
 
अनुत्तम: – त्रि, ( नास्ति उत्तम: उत्कृष्ट: यस्मात् ) =जिससे उत्कृष्ट कोई न हो अर्थात् सर्वश्रेष्ठ ।-शब्दकल्पद्रुम ।
 
अमरकोष में–
“क्लीबे प्रधानं प्रमुखं प्रवेकानुत्तमोत्मा: .”-३/१/५७,  प्रधान, प्रमुख अनु्त्तम और उत्तम शब्द पर्यायवाचीरूप में पठित हैं । अनुत्तम का अर्थ है सर्वश्रेष्ठ , ” नोत्तमो यस्मात् , अतिशयेनोत्कृष्ट: । जिससे उत्तम दूसरा न हो । यह अर्थ कोई ब्राह्मण या पण्डित कर रहा है -ऐसा रामपाल जी या उनके अनुयायी नहीं कह सकते । यह कोष तो अमरसिंह की छठीं शती के आस पास की रचना है ।
 
अब प्राचीन शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ अर्थ में अनुत्तम शब्द कहां आया है ? -इसे हम सप्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं –
मनुस्मृति में –
 
” श्रुतिस्मृत्युदितं धर्ममनुतिष्ठन् हि मानव: .
इह कीर्तिमवाप्नोति प्रेत्य चानुत्तमं सुखम् ।।- २/९,
 
यहां कुल्लूक भट्ट ने मन्वर्थमुक्तावली में अनुत्तम का अर्थ उत्कृष्ट किया है ।-उत्कृष्टं स्वर्गापवर्गादिसुखरूपं । यह श्रुति स्मृति के द्वारा कहे गये धर्म का फल है जो उत्कृष्ट कहा गया है । 
 
 रामपाल जी !   यदि आप कहे कि हमें मनुस्मृति की बात अच्छी ही नहीं लगती है । तब हम आपको ऐसा प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं जिसे आज समग्र विश्व मान रहा है –”योग”.
 
अब आपके समक्ष योगदर्शन का सूत्र प्रस्तुत कर रहे हैं –
 
सन्तोषादनुत्तमसुखलाभ:”–साधनपाद-४२वां सूत्र ,
 
 सन्तोष से अनुत्तम= सर्वोत्कृष्ट सुख, का लाभ होता है । इस पातञ्जल सूत्र में अनुत्तम का अर्थ सर्वोत्कृष्ट व्यासभाष्यकार, वाचस्पति मिश्र प्रभृति सभी विद्वानों ने किया है । सन्त होकर आप पातञ्जल सूत्र को नजरन्दाज नहीं कर सकते । इस अनुत्तम शब्द का घटिया अर्थ तो आप भी नहीं कर सकते हैं । ऐसा नहीं कह सकते  कि “सन्तोष से घटिया सुख मिलता है ।” यह तो आपको भी याद होगा–
 
“गोधन गजधन बाजिधन और रतनधन खान ।
जब आवे सन्तोष धन सब धन धूरि समान ।।”
 
गाय घोड़े आदि सब धूल के समान हैं जब सन्तोष धन आ गया   इन सबसे वो सुख नहीं मिलता जो सन्तोष से प्राप्त होता है । 
 
हमने आपके समक्ष शास्त्रों के दो प्रमाण प्रस्तुत किया कि अनुत्तम का अर्थ सर्वोत्कृष्ट होता है  । इसलिए भगवद्गीता में अनुत्तमां गतिम् ” में अनुत्तम का अर्थ सर्वोत्कृष्ट है । 
 
रामपाल जी एवम् उनके अनुयायियों ! अनुत्तम शब्द सर्वोत्कृष्ट अर्थ का वाचक है -इसमें हमने प्राचीन ग्रन्थ अमरकोष, मनुस्मृति और पातञ्जल योगदर्शन जैसे ग्रन्थों को प्रमाणरूप में प्रस्तुत किया । अब गीता के अर्थ को दूषित करने का दुस्साहस मत करो । संस्कृतभाषा की गन्ध नहीं और रामपाल चले हैं गीता पर बोलने । 
 
यदि वामन आप्टे कोष से कुछ ऊपर उठ सके तो हमारी बात अनुयायियों सहित आपको समझ में आ जायेगी । 
 
#आचार्यसियारामदासनैयायिक
 

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आचार्य सियारामदास नैयायिक भूतपूर्व पीठाध्यक्ष श्रीरामानन्दाचार्यवेदान्तपीठ जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, मदाऊ,पो0 भाँकरोटा , जयपुर, राजस्थान ईमेल:guruji@acharysiyaramdas.com: +91-9460117766

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