विष और विषय में विषय का प्राबल्य

विषयविषयोर्मध्ये विषयश्चण्डघातक: । विषस्य भक्षणान्मृत्यु: विषयस्य तु चिन्तनात् ।।

विष और शब्दादि विषय -इन दोनों में विष से भी प्रचण्ड घातक विषय है ; क्योंकि विष को खाने पर मृत्यु होती है पर विषय का चिन्तन मात्र साधक  की मृत्यु का कारण है । विषय का चिन्तन करने वाले साधक का ऐसा पतन होता है कि अनेक जन्म बिगड़ जाते हैं । 

शब्द को दृष्टि में रखकर विचार करें तो भी विष की अपेक्षा विषय अधिक प्रभावशाली है ;क्योंकि इसमें “य” अक्षर अधिक है । और विष को अपने गर्भ में समेटे हुए है ।

शब्ददृष्ट्या विचारेSपि विषाद् विषयोधिक: । विषये विषं यकारश्च विषं तु केवलं विषम् ।।

 

#आचार्यसियारामदासनैयायिक

टिप्पणियां

टिप्पणियां

Acharysiyaramdas

के बारे में Acharysiyaramdas

आचार्य सियारामदास नैयायिक श्रीरामानन्दाचार्यवेदान्तपीठाध्यक्ष जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, मदाऊ,पो0 भाँकरोटा , जयपुर, राजस्थान ईमेल:guruji@acharysiyaramdas.com: +91-8104248586, +91-9460117766

Comments are closed.