श्लोक

सशपथं प्रवक्ष्यामः श्रूयतां वीरहिन्दुभिः |शत्रुकं कन्दुकं कृत्वा क्रीडामस्तु रणे वयम् ||

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आचार्य सियारामदास नैयायिक भूतपूर्व पीठाध्यक्ष श्रीरामानन्दाचार्यवेदान्तपीठ जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, मदाऊ,पो0 भाँकरोटा , जयपुर, राजस्थान ईमेल:guruji@acharysiyaramdas.com: +91-9460117766

One Response to श्लोक

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    This is a really good read for me, धन्यवाद!